यह जीवन की कठिनाइयों और संघर्षों को दर्शाती है, जहाँ इंसान खुशियों की तलाश में भटकता रहता है। रिश्तों और सपनों के बोझ तले दबकर जब थकान हद से बढ़ जाती है, तब मौत एक सुकूनभरी शांति बनकर आती है। अंत में सवाल उठता है—क्या सच में ज़िंदगी से प्यारी मौत होती है?
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