मौत

यह कविता "मौत" के अटल सत्य को सरल शब्दों में व्यक्त करती है। इसमें बताया गया है कि मृत्यु से कोई नहीं बच सकता, चाहे वह राजा हो या रंक। जीवन क्षणभंगुर है, और अंततः हर किसी को यह संसार छोड़ना पड़ता है। लेकिन डरने की बजाय, इसे स्वीकार करके जीवन को प्रेम और नेकी से जीना ही सच्ची बुद्धिमानी है। मौत को अंत नहीं, बल्कि एक नई यात्रा की शुरुआत के रूप में देखने का संदेश इस कविता में दिया गया है।

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: विजय सांगा
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