सदियों से पुराने बरगद के पेड़ के नीचे जो ढाबा था । उस ढाबे पर भोलू नाम का कुत्ता रहता था, जो अपने जीवन के अकेलेपन से बहुत दुखी रहता था, ऐसा नहीं था कि ढाबे का मलिक और ढाबे के नौकर उसका पूरा ध्यान नहीं रखते थे, बल्कि वह सब तो उसका खाने-पीने का ध्यान रखने के अलावा उससे बहुत प्यार भी करते थे। भोलू कुत्ता तो इसलिए दुखी रहता था, क्योंकि उस हाईवे रोड़ के पास बने ढाबे पर इंसानों के अलावा उसे कोई जानवर तो दूर पंछी भी दिखाई नहीं देता था, क्योंकि उस ढाबे के आसपास खेत जंगल पेड़ पौधों कि जगह खुला मैदान था, और सिर्फ एक पुराना बरगद का पेड़ था जिसके नीचे ढाबा बना हुआ था, खेत जंगल दुसरा ढाबा भी था, किंतु वह कुछ किलोमीटर कि दूरी पर था। और जब भोलू कुत्ते का परी कुत्तिया से प्रेम हो जाता है तो वह परी कुत्तिया से अपने प्रेम का इजहार करने से पहले ही एक अजीबोगरीब जंगल में फस जाता है वहां उसे कुछ खतरनाक खूंखार जानवरों से मुकाबला करना पड़ता है और कुछ अच्छे प्यारे खूबसूरत जानवरों से उसकी गहरी मित्रता हो जाती है।
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