फौजी

फौजी फौजी होते हैं मनमौजी, नहीं होती उन्हें परवाह अपनी। अपने देश अपनी मिट्टी की, खातिर मर मिट जाते हैं। रक्त नहीं बहता उनके शरीर में, जलती देशभक्ति की ज्वाला है। उसमें ही तप कर के फौजी, बन जाता मतवाला है। गांव देश घर परिवार त्याग कर, चल देते वो सरहद पर। नहीं फिकर उन्हें किसी बात की, चाहे परिस्थितयां बदले कितने करवट। उनका एक ही लक्ष्य जीवन का, आंच वतन पर ना आने दूंगा। चाहे मारूंगा चाहे मरूंगा, एक इंच ना भीतर घुसने दूंगा।

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कविता

: निर्मेश
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