मेरे दादा जी किस्मत वाला नहीं था इतना, कि दादा जी के संग खेलता। उन की उंगली पकड़ कर चलता, बाहों में मैं उनके झूलता। दादा जी को करता याद मैं तब तब, दोस्तों को देखता उनके दादा जी के साथ मैं जब जब। रोते रोते मै हठ करता, सभी से ये सवाल था पूछता। मेरे दादाजी क्यों पास नहीं है..? क्या करते वो मुझको प्यार नहीं है.? सब मुझको समझाते थे, प्यार से ये बतलाते थे। दादा जी थे बहुत अच्छे इंसान, इसलिए भगवान ने बुला लिया उनको अपने पास।
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