आनंद आश्रम एक खूबसूरत जगह है जहां अनाथ बच्चे एक परिवार की तरह रहते हैं। डॉ. विनोद शर्मा, एक सेवानिवृत्त शिक्षक, ने अपनी स्वर्गवासी पत्नी की इच्छा को पूरा करने के लिए इस आश्रम की स्थापना की थी। यहां पर बच्चे एक दूसरे के साथ मिलकर रहते हैं, पढ़ते हैं, खेलते हैं और जीवन के हर पल को खुशी के साथ जीते हैं। आश्रम में नील और सिया जैसे बच्चे अपनी मेहनत और लगन से जीवन की कठिनाइयों का सामना करते हैं। एक दिन रघु नाम का नया बच्चा आश्रम में आता है, जिसे नील और सिया अपनापन का एहसास दिलाते हैं। त्योहारों का जश्न, नाटकों का आयोजन, और छोटे-मोटे काम करके पैसे जुटाना आश्रम की दिनचर्या का हिस्सा है।
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