शिकवा नहीं कभी

शिकवा ना शिकवा ना गिला किसी से, कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ती, सहती जीवन के तूफानों को, उफ...तक जबां से कभी ना करती, जोड़े हर रिश्तों की माला, नरम गरम सब सहती रहती, ऐसी प्यारी होती नारी, जिसको माने दुनिया सारी। नारी है अस्मिता परिवार की, नारी से है पहचान। कर जाती है ये सब कुछ, जो ले ये दिल में अपने ठान।

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कविता

: निर्मेश
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