बचपन वाला स्कूल बचपन वाला स्कूल, मैं कैसे जाऊं भूल। जिसमें होती थी मौज मस्ती, चलती थी खुशियों की कश्ती। हमारे दिल में है बसती, जिसने बनाई हमारी हस्ती। ढेर सारे थे दोस्त हमारे, जिनके आंखों के हम तारे। किसी से भी बैर नहीं था, जो लड़ता मुझसे उसका खैर नहीं था।
© Copyright 2023 All Rights Reserved