"दहेज पीड़ा" (कविता):- ये बीते गुजरे वक्त में पिता की ओर से व्यक्त करे उसके भाव जो वो अपनी बेटी के लिए वो गुनाह भी कर जाता है जिसका मलाल उसे भी रहेगा मगर उसकी बेटी की जिंदगी भी संवरी रहेगी खुशहाल रहेगी उन भावों को सोचकर लिखा गया है स्वरचित । #प्रतियोगिता हेतु
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