माटी का खिलौना माटी का खिलौना है ये तन, जब ये समझ जाएगा हमारा मन। तब सुख दुख से ऊपर उठ जाएगा, जीवन का आनंद तभी तो पाएगा। क्या अभिमान करे उजले तन पर, इक दिन मिट्टी में मिल ही जाएगा। क्या गर्व करे अपने पद पर, एक दिन तो वो भी छूट जाएगा। माटी का खिलौना है ये तन, जब ये समझ जाएगा हमारा मन। कितना संचय कर के रक्खो, जोड़ गांठ कर के रक्खो, सब यही तो धरा रह जाएगा, कुछ साथ ना तेरे जाएगा। सोने चांदी से सजा लो बदन, हीरे मोती तुम खूब लो पहन। सब कुछ इक दिन उतर जाएगा, कुछ संग ना तेरे जाएगा।
© Copyright 2023 All Rights Reserved