इंदौर शहर की गौरी, जिसने अपना पूरा जीवन निस्वार्थ सेवा में समर्पित कर दिया। न कोई अपना, न कोई सहारा, पर फिर भी, उसने कभी अकेलापन महसूस नहीं किया। क्योंकि अनाथालय के बच्चे ही उसका संसार थे। माँ की ममता, दोस्त की हंसी और मार्गदर्शक की सीख, गौरी ने इन नन्हें बच्चों को सबकुछ दिया, बिना किसी स्वार्थ के। उसके लिए अनाथालय सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि उसका घर था, और वहां रहने वाले बच्चे उसकी दुनिया। उसने अपनी खुशियों, सपनों और इच्छाओं को भुलाकर केवल एक लक्ष्य रखा, इन मासूम चेहरों पर मुस्कान बनाए रखना।
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