इजहारे इश्क़ यह कविता गुलाब के ज़रिए इश्क़ के सफर को बयां करती है। गुलाब सिर्फ़ एक फूल नहीं, बल्कि मोहब्बत का पैग़ाम है, जो पहली नज़र के प्यार से लेकर जुदाई के आंसुओं तक हर एहसास का गवाह बनता है। गुलाब इज़हार का जरिया बनता है, खुशबू से रिश्तों को महकाता है, मगर कभी-कभी यह बिछड़ने की दर्दभरी यादों का सबब भी बन जाता है। जो कल तक इकरार का निशान था, वही आज किताबों में सुखी पंखुड़ियों की तरह दबी याद बन चुका है। कविता बताती है कि हर इश्क़ मुकम्मल नहीं होता, लेकिन गुलाब की तरह मोहब्बत की खुशबू हमेशा बाकी रहती है।
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