“किरायेदार” एक मजेदार कहानी है, जिसमें सख्त मिजाज मकान मालिक पंडित हरिराम मिश्रा की जिंदगी तब पलट जाती है जब उनके घर आता है चुलबुला और हंसमुख किरायेदार मुकेश यादव। मुकेश की शरारतें और हंसी-ठिठोली पंडित जी के सख्त नियमों से टकराकर हंसी का तूफान खड़ा कर देती हैं। पढ़ते-पढ़ते आप हंसी रोक नहीं पाएंगे! हंसी, मस्ती और किरायेदारी का अनोखा तड़का—यही है इस कहानी के किरायेदार का कमाल।
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