एक फरियाद

करता फरियाद मैं तुमसे प्रभु जी, चरणों से अलग कभी मत करना। जब अंत समय आए दास का, इक बार दरस तुम दे देना। ना चाहूं मैं महल दुमहला, ना चाहूं बंगला या कोठी। ना चाहूं सोना ना चांदी, ना चाहूं मैं हीरे मोती। जब लूं सांस आखिरी, आंखों में हो सूरत तेरी। करता फरियाद मैं तुमसे प्रभु जी, चरणों से अलग कभी मत करना।

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दैनिक प्रतियोगिता

: निर्मेश
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