रामशरण वर्मा, एक बुजुर्ग व्यक्ति, अपने मकान में एक नए किरायेदार अर्जुन को रखते हैं। लेकिन जल्द ही, उनके घर में अजीब घटनाएँ होने लगती हैं—रहस्यमयी चिट्ठियाँ, रात में अजीब आवाज़ें, और अर्जुन का रहस्यमयी व्यवहार। जब रामशरण मकान के पुराने दस्तावेज़ खंगालते हैं, तो पता चलता है कि 40 साल पहले अर्जुन नाम का व्यक्ति इसी मकान में मारा गया था। लेकिन फिर जो अर्जुन उनके घर में रह रहा था, वह कौन था? इस रहस्य को सुलझाने के लिए रामशरण पुराने अख़बारों और गुप्त निशानों की खोज करते हैं, जिससे अर्जुन की हत्या का असली गुनहगार सामने आता है। न्याय मिलने के बाद अर्जुन की आत्मा मुक्त हो जाती है, और मकान में हमेशा के लिए शांति लौट आती है।
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