यह कविता प्रकृति के उस सुंदर क्षण को दर्शाती है जब ठंड के सूनेपन को पीछे छोड़कर वसंत ऋतु जीवन में नई ऊर्जा भर देती है। कोयल की मधुर कूक, तितलियों के रंग-बिरंगे पंख, और फूलों की खिलती मुस्कान इस ऋतु के सौंदर्य को और भी आकर्षक बनाते हैं। यह कविता वसंत को केवल एक ऋतु नहीं, बल्कि नवजीवन, प्रेम, और उम्मीद का प्रतीक मानती है।
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