"कलंकिनी" एक रहस्य और आत्म-खोज की अद्भुत कथा है। यह कहानी सुरंगपुर की रानी मृणालिनी की है, जिन्हें जन्म के समय एक भयंकर श्राप मिला था—जहाँ भी जाएंगी, विनाश होगा। लोगों ने उन्हें "कलंकिनी" कहा और राज्य से निष्कासित कर दिया। लेकिन वनवास के दौरान, उन्हें पता चला कि वे श्रापित नहीं, बल्कि एक दिव्य शक्ति की स्वामिनी हैं। महासाध्वी त्रिकालविद्या ने उन्हें उनकी सच्चाई से अवगत कराया। अंततः, जब उनके शत्रु भानुसेन ने हमला किया, मृणालिनी ने अपनी शक्तियों को जागृत कर दिखाया कि वे कलंकिनी नहीं, बल्कि एक देवी हैं। यह कहानी नारी-शक्ति, आत्म-साक्षात्कार और समाज की रूढ़ियों को तोड़ने का प्रतीक है।
© Copyright 2023 All Rights Reserved