जब वसुधा ओढ़े हरित चादर, बिखरें फूलों के गहने, मंद पवन जब बहने लगती, महक उठे धरा अपने। कोयल कूके आम्र-वृक्ष पर, गूंजे पंची के मधुर गान, फूलों पर भंवरें मंडराएँ, गूँज उठे मधुमय तान।
1. 10 | 7 | 10 | 5 | | 04-02-2025 |
© Copyright 2023 All Rights Reserved