"कलंक" एक प्रेम, विद्रोह और बदले की दास्तान है। बलराज और रूहाना की मोहब्बत समाज की साज़िशों में घिरकर दर्द और तबाही में बदल जाती है। जब प्रेम पर बेबसी का कलंक लग जाता है, तब यह नफरत की आग में जल उठता है। एक ऐसा इश्क़, जो मरकर भी अमर हो जाता है।
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