आशीर्वाद

जब बात लगे बिगड़ने, जब मन लगे घबराने। तब इस व्याकुल मन को, किसी शीतल छांव की होती है दरकार, अपनों के आशीर्वाद भरे हाथ के सर पर अपने रखने का होता है इंतजार।

17 Views
Time : 1 Min

All Right Reserved
दैनिक प्रतियोगिता

: निर्मेश
img