यह कविता धरती मां के अटूट प्रेम और उसके दिए आशीर्वाद का गुणगान करती है। इंसान उसके संसाधनों का दोहन करता है, फिर भी वह बिना किसी भेदभाव के सबको संजोए रखती है। यह कविता हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और संवेदनशीलता का संदेश देती है।
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