सुदूर अरण्य में, जहाँ सूरज की किरणें भी जाने से डरती थीं, वहाँ स्थित था "काला जादू"—एक रहस्यमयी जंगल। इस जंगल की गहराईयों में बसी थी एक प्राचीन शक्ति—चुड़ैलों की देवी "काली वामा" और भूतों का देवता "भैरव नाथ"। यह दोनों शक्तियाँ अंधकार की दुनिया के स्वामी थे, जिनकी पूजा तांत्रिक, अघोरी और काले जादू के साधक किया करते थे। काली वामा, एक ऐसी देवी थी जो चुड़ैलों की अधिष्ठात्री थी। कहा जाता था कि जो स्त्रियाँ छल, पीड़ा और अन्याय का शिकार होती थीं, उनकी आत्माएं मरने के बाद चुड़ैल बन जाती थीं और काली वामा की सेना में शामिल हो जाती थीं। वहीं, भैरव नाथ मृत आत्माओं, भूत-प्रेतों और अन्य दुष्ट शक्तियों के देवता माने जाते थे। वह उन आत्माओं को नियंत्रित करते थे जो इस लोक और परलोक के बीच फंसी होती थीं।
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