चांदनी रात में हम अकेले बैठे हैं

कभी चंद की रोशनी में अकेले बैठे हो , उस पुरे आसमान में एक मात्र वो ही है। जिस की रोशनी ने सब का एक अजीब सी सुकून पहुंचती है तो सुनाई मेरे शब्द।

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कविता

: Saraswati
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