चांदनी बिखरी धरा पर, चुपके से मुस्कुराए, शीतल किरणें गगन से, धरती को सहलाए। नदियों के जल में छनकर, मोती-सी झिलमिलाए, शाखों पर छनती रोशनी, सपनों को बहलाए।
1. चांदनी रात 16 | 11 | 14 | 5 | | 30-01-2025 |
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