चांदनी रात

रात चांदनी की जब आती है, तन मन मुस्का उठता है। उसकी निर्मल शीतलता से, सब तपन शांत हो जाता है उस रात भी तो चांदनी छिटकी थी, जब हम तुम पहली बार मिले थे।

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दैनिक प्रतियोगिता

: निर्मेश
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