करिए ऐसा हमेशा कर्म, जिसपे आए नहीं कभी शर्म। कर्म के फल से नहीं, रहता कोई अछूता। चाहे कर्म हो अच्छा, या हो कर्म बुरा।
1. कर्म 13 | 10 | 13 | 5 | | 29-01-2025 |
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