कर्म

करिए ऐसा हमेशा कर्म, जिसपे आए नहीं कभी शर्म। कर्म के फल से नहीं, रहता कोई अछूता। चाहे कर्म हो अच्छा, या हो कर्म बुरा।

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दैनिक प्रतियोगिता

: निर्मेश
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