कर्मा का चक्र एक नैतिक व ऐतिहासिक कथा है, जो कर्म के अटल नियम को दर्शाती है। काशी राज्य के राजा विजयसेन, अपने मंत्री महाधन की सलाह पर, प्रजा पर कठोर कर लगा देते हैं। इससे प्रजा कष्ट में आ जाती है, और एक साधारण किसान माधव विद्रोही बन जाता है। धीरे-धीरे राज्य की अर्थव्यवस्था ढहने लगती है, और विद्रोह बढ़ता जाता है। माधव के नेतृत्व में क्रांति होती है, और राजा का पतन शुरू हो जाता है। अंततः, राजा को अपने कर्मों का फल भुगतना पड़ता है, लेकिन माधव प्रतिशोध के बजाय न्याय करता है। यह कहानी सिखाती है कि कर्म का चक्र घूमता रहता है और अन्याय का अंत निश्चित होता है।
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