परोपकार

पहले की थी बात निराली, कोई दरवाजे से ना जाता था खाली। दिल में था परोपकार का भाव, जरूरत मंद को मिल जाती थी छांव। जिसकी छांव में पलते देखा, कईयों के दिन बदलते देखा। जो था सब मिल कर खाते थे, दुख के दिन कट जाते थे।

14 Views
Time : 1 Min

All Right Reserved
दैनिक प्रतियोगिता

: निर्मेश
img