"वक्त हिसाब करेगा" यह कविता मानवता के खत्म और पापों के बढ़ते बोझ को दर्शाती है। रिश्तों की टूटती डोर, इंसानियत का अंत, और घमंड के अंधकार में डूबती दुनिया की तस्वीर उकेरी गई है। जब हर इंसान अपने ही स्वार्थ में डूब जाएगा, तब वक्त खुद न्याय करेगा। हर कर्म का हिसाब होगा, हर झूठ का पर्दाफाश होगा। यह कविता एक चेतावनी है कि अभी भी समय है, संभल जाओ, क्योंकि वक्त कभी किसी को नहीं छोड़ता।
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