अनमोल है वो वीर हमारे, जो रणभूमि में जय के तारे। मातृभूमि के खातिर बलिदान, रचते हैं अमरता की पहचान। तलवार की धार से जो खेलता, शत्रु के हृदय में भय का तेल भरता। जो बढ़ता है तूफानों से भिड़कर, आंधियों में भी चलता है टिककर। वो रक्त की बूंदों से लिखता इतिहास, हर सांस में बस देश का विश्वास। गर्जना उसकी सिंह समान, झुकाए ना सिर, करे शत्रु परेशान। उसकी कसम है देश की आन, हर कीमत पर रखे भारत महान। चाहे प्राण जाए, पर पीछे ना हटे, रणभूमि में विजय पताका लहराए सटके। उसकी वीरता का कोई मोल नहीं, अनमोल है वो, जैसे सूरज की किरण कहीं। धरती मां के चरणों का श्रृंगार है, हर वीर हमारे लिए अनमोल उपहार है। तो झुके सलाम उसके चरणों में, जिसकी गाथाएं गूंजें अंबरों में। अनमोल वीर हैं जो कुर्बान होते, देश की रक्षा में अपने प्राण देते। अदिति जैन
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