तेरे दीदार को हूं तरसती, अंखियों तुझे याद कर हैं बरसती। कब दोगे दरस तुम प्रभु जी, दिन रात करती हूं तुमसे विनती। दिन रात सुबह शाम, हर पहर जुबां पर बस तेरा ही नाम।
1. दीदार 15 | 10 | 14 | 5 | | 21-01-2025 |
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