बेटे की ख़्वाहिश....

आज भी हमारे समाज में बहुत से लोग ऐसे मौजूद है जिन्हें बेटों की ख्वाहिश रहती है चाहे पाँच छः बेटियाँ ही क्यों न हो, वैसा ही कुछ इस कहानी में है।

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दैनिक प्रतियोगिता

: तृप्ति सिंह
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