स्वैच्छिक कहानी: "सपनों की उड़ान" काव्या का जन्म एक छोटे से गाँव में हुआ था, जहाँ जीवन बहुत साधारण था। उसके पिता, श्रीवास्तव जी, गाँव के सरकारी स्कूल में अध्यापक थे और माँ, सुमिता जी, घर के कामकाज में व्यस्त रहती थीं। काव्या का जीवन भी बहुत सामान्य था, लेकिन उसका सपना कुछ बड़ा था। वह हमेशा आसमान में उड़ने और हवाई जहाजों के बारे में सोचती रहती थी। हवाई जहाजों का शोर, उनके विशाल पंख और आकाश में उड़ने की कल्पनाएं उसे बचपन से ही आकर्षित करती थीं। उसे हमेशा लगता कि एक दिन वह भी हवाई जहाज की पायलट बनेगी।
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