बाबुल के आँगन से जब कदम बढ़ाए, सपनों की गठरी में अरमान सजाए। माँ की गोद की गर्मी अब यादों में है, नई दुनिया में हर बात अनजानी सी है। चूड़ी की खनक अब जिम्मेदारियों की गूँज है, हँसी की मस्ती में छुपी हल्की सी उलझन है। रंग बिरंगे जोड़े में सजी मैं नई, दिल में हलचल, मन में उम्मीदें भरी। उसका घर अब मेरा संसार बनेगा, मेरी पहचान को नया आकार मिलेगा। हर रिश्ते को अपना बनाना है मुझे, नए आकाश में उड़ना, पर जड़ें थामनी है मुझे। यह बदलाव है कठिन, पर खूबसूरत भी, नया सफर, नया मोड़, है अद्भुत भी। नयी शुरुआत में छलके जो अश्रु, वे आशीर्वाद हैं, खुशी के आँसू। तो चलो, इस राह पर दिल से कदम रखती हूँ, नयी उम्मीदों के साथ खुद को सजाती हूँ।
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