किताब में कितनी दर्द छुपी होती शायद हम भी ना समझ पाते हर एक पन्ने में हर दर्द छुपी होती आज। म उसी से रुबरु कराते हैं इस कविता के जरिए
1. किताब का दर्द 17 | 11 | 15 | 5 | | 17-01-2025 |
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