किताब का दर्द

एक किताब नहीं होती है सिर्फ किताब, उसमें है दर्ज है होता, किसी के उम्र भर का हिसाब। किसी की अनुभवों का पिटारा, लेखक के तजुर्बों का खजाना, ले जाती है अलग दुनिया में ही किताब।

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: निर्मेश
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