काश वो दिन लौट आते

साक्षी की यादें हर रोज उसे तड़पाती थीं। कभी फोन नंबर मिलाने की कोशिश करता, पर हिम्मत हार जाता। आखिरकार, उसने मान लिया कि कुछ चीजें सिर्फ यादों में जीने के लिए होती हैं।

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: Naaz
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