हाथ की लकीरें

बचपन की है ये बात, जरा तुम सुनना ध्यान से। हाथ की लकीरें देख कर, बताते थे कुछ लोग। तेरी किस्मत बुलंद है, है लिखा इसमें राज योग। हम भी थे बड़े भोले, कर बैठे यकीन उनकी बात पर। दिन रात थे सोते, ना दुखी होते थे किसी बात पर। गुजर गया बचपन, ऐसे ही मस्ती में। ना किस्मत मेरी जागी, ना आया राजयोग। हां रिजल्ट जरूर आया, जिसमें ले दे के पास हुए हम। जब लगी ठोकर जमाने की, सुनकर तानों से कान गए पक।

17 Views
Time : 1 Min

All Right Reserved
दैनिक प्रतियोगिता

: निर्मेश
img