त्याग दो बेशक मुझे तुम, पर सुकून कहीं तुम ना पाओगे। रूह में बसी हूं मैं तुम्हारी मुझ बिन जी न पाओगे। तेरी हर सांस में हर सोच में, तेरे होठों से निकले हर शब्द में, तेरी समाहित मैं ही हूं।
1. 16 | 11 | 15 | 5 | | 13-01-2025 |
© Copyright 2023 All Rights Reserved