बदलते चेहरे

यह कविता इंसानी भावनाओं और रिश्तों की गहराइयों को उजागर करती है। समय के साथ बदलते चेहरे, नकाब के पीछे छुपे सच, और समाज की परतों में खोती सच्चाई को यह रचना बड़े ही मार्मिक और सरल शब्दों में प्रस्तुत करती है। यह कविता हमें सिखाती है कि असली सुंदरता बाहरी चेहरे में नहीं, बल्कि दिल की सच्चाई और भावनाओं की गहराई में होती है।

13 Views
Time : 1 Min

All Right Reserved
दैनिक प्रतियोगिता

: विजय सांगा
img