फिसलता वक्त

फिसलता है वक्त ऐसे, मुट्ठी से रेत जैसे। लाख कर को जतन तुम फिर भी, रोके ना रुकता है ये वक्त। चाहे अच्छा हो या कि कितना भी बुरा ये वक्त। सब गुजर ही जाता है, खुशी और ग़म के साथ ये वक्त।

14 Views
Time : 1 Min

All Right Reserved
दैनिक प्रतियोगिता

: निर्मेश
img