बचपन

यह कविता बचपन की मासूमियत और उसके सुनहरे पलों को समर्पित है। इसमें मिट्टी की खुशबू, आम के पेड़ की छांव, मां की कहानियों और दोस्तों के संग बिताए अनमोल लम्हों का वर्णन किया गया है। यह कविता हमें उस बेफिक्र समय की याद दिलाती है जब हर दिन सपनों की उड़ान और हंसी-खुशी से भरा होता था। बचपन की मिठास और उसकी सादगी को सरल शब्दों में पिरोया गया है, जो हर दिल को छू लेगी।

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दैनिक प्रतियोगिता

: विजय सांगा
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